सच्चा सुख
प्रणाम दोस्तो, आज की यह कहानी है सच्चा सुख क्या होता है ।
एक राजा था जिसके राज्य पर कोई दूसरा राजा आक्रमण नहीं करता था । क्योंकि उसकी सेना बड़ी विशाल थी । उसे कोई पराजित नहीं कर सकता था । अब राजा को लगा कि यदि उसके राज्य पर कोई आक्रमण नही कर रहा तो उसकी प्रजा कितनी खुश होगी उसे कितनी दुआएं देती होगी । इसलिए उस राजा ने दरबार में बड़ी सभा बुलाइ । उस सभा में संतो को भी आमंत्रित किया । वो सभा राजा ने अपनी प्रजा की तारीफे बटोरने के लिये बुलाई थी । सभा शुरू हुई , उपस्थित सभी प्रजा अपने दुख राजा को बताने लग गयी ।
एक इंसान ने कहा " मेरे बेटा मेरा कहना नहीं मानता इसलिए में बहुत दुःखी हूँ।" दूसरे ने कहा " मेरी खेती अच्छी नहीं चल रही इसलिए दुःखी हूँ। तीसरे ने कहा " महाराज मेरा विवाह नहीं हो रहा में तो सबसे अधिक दुखी हूं ।" एक माई ने कहा " महाराज हमेशा बिमार रहती हूं कोई दवा काम नही कर रही बड़े दुख में हूँ " एक लड़की ने कहा " मेरा पति मेरा कहना नहीं मानता में क्या करूं?"
अब राजा तो सोच में पड़ गया क्योंकि हर किसी के जीवन में कोई न कोई दुख था । तब एक संत आगे आये उन्होंने राजा से कहा " मैं तुम्हें एक प्रश्न पूछता हूँ उसका सही उत्तर यदी तुम दे सको तो तुम तुम्हें इन सबके प्रश्न के उत्तर मिल जायेंगे । इस दुनिया में सबसे अधिक सूखी कौन है?" उन संत राजा को दो दिन का समय दिया और कहा " मैं दो दिन में वापस आता हूँ , तब तुम जवाब ढूंढ लेंना ।" राजा ने ये बात मान्य कर ली । और वो खोज में लग गया "
अब दो दिन बाद वो संत लौटे औऱ उन्होंने पूछा कि जवाब मिला क्या ? राजा ने कहा हम हार गए दुनियां में ऐसा कोई व्यक्ति नही है जिसे कोई दुख ना हो हर किसी को कोई न कोई दुख तो है । तुमने तो केवल यहाँ धरती पर ढूंडा है आओ हम तुम्हे स्वर्ग में ले चले । स्वर्ग में अप्सराओं का नृत्य देखकर सभी देवता आनंदित हो रहे थे । देवताओं ने संत जी को देखा तो सभी उठकर प्रणाम करने लग गये । उन्हें बैठने के लिए उचित स्थान दिया । तब संत ने कहा " ये जो मेरे साथ आए है एक बहुत बडे राज्य के राजा है । और जानना चाहते है कि आप सब यहा पर कितने सुखी हैं । " तब देवताओं के राजा इंद्र ने कहा "हम काहे के सूखी हमे तो
प्रतीदीन भय लगा रहता है की पता नही कब कोई असुर आक्रमण कर दे स्वर्ग पर और हमें यहा से भागना पड़ जाए , हम तो बहुत दुखी हैं । हमसे अधिक सुख को ब्रम्हदेव को है आप उन्हींके पास जाइये।" अब राजा और वे संत पहुँच गये ब्रह्मदेव के पास ब्रम्हदेव से भी वही सवाल किया तब ब्रह्मदेव ने कहा" हमे भी कोई सुख नही संसार को बनाने में ही सारा समय चला जाता हैं । हमसे अधिक सुख तो भगवान विष्णु के पास है । आप उनके पास जाईये।" अब वे दोनो पहुंचे भगवान विष्णु के पास और उनसे भी वहीं सवाल किया । भगवान विष्णु ने कहा " हम तो भक्तों के दास है जैसे वे नचाये नाचते रहते है हम काहे के सुखी आप भक्तों के ही पास चले जाइए वो ही सच्चें सुखी है " अब राजा को लगा कि इस दुनियां में कोई सुखी नही सब दुखी है पर संत जी ने कहा " अभी निराश ना हो औऱ एक जगा शेष है जो भगवान विष्णु ने बताई थी ।"
अब वो दोनों पहुंचे भक्तो के पास जहा दुर से ही कीर्तन की आवाजें सुनाई दे रही थीं । उन्होंने उनसे भी वही प्रश्न करने की कोशिश की कीन्तु उनमेसे किसी का ध्यान ही नही था उनके प्रश्नो पर वे तो सभी मस्त्ती में हरी बोल कर रहे थे ।
अब वो दोनों पहुंचे भक्तो के पास जहा दुर से ही कीर्तन की आवाजें सुनाई दे रही थीं । उन्होंने उनसे भी वही प्रश्न करने की कोशिश की कीन्तु उनमेसे किसी का ध्यान ही नही था उनके प्रश्नो पर वे तो सभी मस्त्ती में हरी बोल कर रहे थे ।
आगे की कहानी अगली पोस्ट में तब तक के लिये " जय सियाराम" " राधे राधे "
Nice story😊
ReplyDeleteThanks
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