Krishna leela

                                                     गोपी कृष्ण का संबंध 


गोपी कृष्ण 
    दोस्तों  हमने पिछली पोस्ट देखा की कृष्ण किस कदर राधारानी के खयालो में खो जाते थे | राधा कृष्ण की प्रेम गाथा कोई साधारण प्रेम गाथा नहीं है  वो समर्पण की पराकष्ठा है ,अद्वितीय  संबंध है | जिसे बोलने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है | हम राधाकृष्ण के बारे में आगे भी देखेंगे अभी हम चलते है गोपीयो के प्रेम की ओर |  गोपियों और कृष्ण की बातों को आज का समाज बहुत हिन् दृष्टि से देखता है | जबकि गपियों के समान प्रेम तो साक्षात् राधारानी भी कृष्ण से नहीं करती थी | एक बार की बात है कृष्ण चैन  से अपनी बांसुरी  बजा रहे थे | किंतु कृष्ण को चैन से बांसुरी बजाते देख गोपियों का ह्रदय बेचैन हो गया | वे सभी आपस में कृष्ण की बातें करने लग  गयी | एक गोपी ने कहा  "कृष्ण हर बार हमें हमारी मटकी तोड़ कर. माखन चुराकर बहुत सताता है, अब हम उसकी जान से प्यारी बांसुरी छीनकर उसे सताएंगी और वापस देंगी ही नहीं| " उसपर दूसरी गोपी ने कहा," उसकी बांसुरी छीन  लेने से उसे बड़ी तकलीफ होगी वो बहुत तड़पेगा , क्या हम जिससे प्रेम करते उसे तड़पाना ठीक है , मैं  तो उसके चेहरे पर थोड़ी सी उदासी भी नहीं देख सकती क्योंकि मैं  उससे बहुत प्यार करती हूँ |"
उसपर पहली गोपी ने कहा, "प्रेम तो उससे हम सभी करते है, किंतु प्रेम का असली आनंद तो तड़पाने में ही आता है,जिस प्रकार भोजन में केवल मीठा खाने से मन ऊब जाता है उसीप्रकार  प्रेम में भी थोड़ी सी खटास आवश्यक है इससे प्रेम का आनंद दुगना हो जाता है, बड़े दावपेज होते है इस प्रेम युद्ध में  चलो अब उसकी बांसुरी को उससे अलग करते है | "
                  तभी वो सारी गोपिया कृष्ण के पास पहुंच गयी परंतु कृष्ण तो आँखें बंद करके बांसुरी बजाने में व्यस्त थे | तभी उनमेसे एक गोपी चिल्लाई ," हाय मेरे पैर में मोच आ गयी बहुत दुख रहा है, हाय अब में क्या करू?" दूसरी गोपी ने कहा, " लाओ मैं  देखु, अरि सखी ये तो बहुत गहरी चोट है ऐसे ठीक नहीं होगी वैद्यजी के पास जाना होगा | " तभी  उस गोपी ने कहा," अरि सखी मैं  तो एक कदम भी नहीं चल सकती अब मैं  क्या करू?" और वो जोर जोर से रोने लग गयी | कृष्ण उसकी आवाज सुनकर वहा  पहुंच गए| कृष्ण ने पूछा," क्या हुआ सखी क्यों चिल्ला रही हो कोई कष्ट है तुम्हे | वो गोपी कृष्ण के आवाज सुनकर मंत्रमुग्ध हो गयी और बोली " है प्रेम का कष्ट है | "  कृष्ण ने आश्चर्य से पूछा  , " क्या? " | तभी उस  गोपी ने कहा ," देखते हो फिर भी पूछ रहे हो मेरे पैर में मोच आ गयी है | मुझसे चला ही नहीं जा रहा मैं  क्या करू इतनी सारी मटकिया लेकर जानी है यदि तुम सहायता कर दोगे तो बड़ी मेहेरबानी होगी | " कृष्ण ने कहा " मैं तुम लोगो को सताता हु इसीलिए कही तुम मुझे सताने के लिए ये नाटक तो नहीं कर रही " गोपी ने कहा ," अरे नहीं कान्हा, तुम देख नहीं रहे मैं  कितनी तकलीफ में हूँ, मैं  नाटक क्यों करूंगी भला यदि तुम्हे नहीं मदत करनी तो मत करो | " कृष्ण कहा," ठीक है अब तुम इतना कहे रही हो तो बोलो क्या करना होगा?  " गोपी ने कहा," बस मेरी इन मटकियों को मेरे घर तक पंहुचा दो, परंतु उससे पहले कसम खाओ की कुछ भी हो जाये तुम मेरी मटकी छोड़कर नहीं जाओगे उन्हें निचे  उतारकर नहीं रखोगे | " कृष्ण ने कहा, " हा मैं कसम खाता हूँ मटकी निचे नहीं रखूँगा जबतक तुम नहीं कहोगी " गोपी ने कहा, " ऐसे नहीं राधा की कसम खाओ" कृष्ण ने कहा," अच्छा है हरबार मुझे राधा की कसम देकर बांध देती हो, ठीक है मैं  राधा की कसम खाकर कहता हूँ मटकी निचे नहीं रखूँगा| " गोपी ने कहा, " तो फिर ठीक है उठाओ ये मटकियां और रखो अपने सर पर| " कृष्ण ने कहा, " जैसी तुम्हारी आज्ञा किंतु मैं  अकेला कैसे रखूँगा तुम सबको ये मटकिया रखनी पड़ेंगी | " गोपियों ने कहा, " तुम उठा तो लोगे ना, कही फोड़ तो नहीं दोगे| "  कृष्ण ने कहा," मुझपर विश्वास रखो मैं तुम्हारे विश्वास को कभी नहीं तोडूंगा | " कृष्ण ने बांसुरी को कमर में बाँधा और गोपियों ने एक एक करके मटकियां कृष्ण के सर पर रखी | अब कृष्ण मटकियां लेकर चलने लगे| 

अब गोपियों ने  कृष्ण की बांसुरी को कैसे चुराया? और तब कृष्ण ने क्या किया?  ये देखेंगे अगली पोस्ट में तब तक "जय सियाराम" "राधे राधे" 

  

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Milan Tomic

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