कृष्ण लीला
मित्रो पिछ्ली पोस्ट में हमने देखा कि कैसे गोपियो ने चालाकी से कृष्ण के सिर पर मटकी रख दी । अब कृष्ण बिचारे मटकी सर पर लिए चल रहे थे।एकसाथ सिर पर चार मटकिया लेकर चल रहे थे । गोपिया आगे आगे कृष्ण पीछे पीछे । गोपिया हँसी मज़ाक करते हुए चल रही थी कृष्ण बिचारे मटकी संभाल रहे थे । अब कृष्ण ने देखा कि जिसके पैर में मोच लगी थी वो गोपी भी आराम से चल रही हैं । कृष्ण ने उस गोपी से कहा," अरे तुम्हारा पैर तो ठीक है फिर तुमने अपनी मटकियां मुझे क्यो दी?झूट क्यों बोला?" उस गोपी ने कहा," क्यों रे कान्हा झूट बोलनेका, सतानेका ठेका क्या केवल तुमने ले रखा हैं? क्या हम नहीं कर सकती ? हमने भी तुम्हारे साथ मजाक किया है ।" कृष्ण ने कहाँ," अच्छा चोर के घर में चोरी, जाओ मैं नही उठाता तुम्हारी मटकियां ।" ऐसा कहकर कृष्ण मटकियां नीचे रखने लग गए । तभी उस गोपी ने कहा," देखा सखी मैं नहीं कहती थी कृष्ण का राधा के प्रति प्रेम झूठा है। केवल राधा ही कृष्ण से सच्चा प्रेम करती है कृष्ण का प्रेम तो छलावा है छलावा अन्यथा कृष्ण राधा की कसम नही तोड़ता ।" तभी कृष्ण को याद आया कि उन्होंने तो राधा की कसम खा रखी है तब उन्होंने उन मटकियों को सँभाल लिया औऱ व्यंग देकर गोपियो से कहा ," आज राधा की कसम देकर तुम लोगो ने मुझे फसा दिया मगर मैं भी देख लूंगा ।" इसपर गोपियो ने कहा , " हमे बाद मे देख लेना कान्हा, अभी रास्ते में तुम्हारा गाव आनेवाला है वहाँ तुम्हारी सखा मंडली तुम्हे इस हालात में देखेगी तो क्या कहेगी ये विचार किया है तुमने।" उनमेसे एक गोपी ने कहा ," अरे वो कहेंगे कृष्ण ने ये नया काम शुरू किया है माखन प्राप्त करने के लिए।" दूसरी गोपी ने कहा ,यदि राधा ने , यशोदा मैया ने, नंदबाबा ने देख लिया तो वे क्या कहेंगे।" कृष्ण तो सोच सोच कर हैरान रह गये । अब क्या करे ? वे उन गोपियो से विनती करने लगे," देखो मेरी प्यारी गोपियो कृपया अब इस नाटक पे पड़दा डालो, मुझे जाने दो अपनी कसम वापस लेलो" । गोपियो ने कहा " ना ना कन्हैया इतना अच्छा अवसर मिला है तुम्हे सताने का वो हम थोड़ी छोड़ने वाले है , आज तो हम तुम्हारा वो हाल करेंगे कि तुम हमेशा याद रखोगे, अब चलो हमारे पीछे पीछे और खबरदार अगर किसीको कुछ बताया तो हम तुम्हारी और राधा की कभी भेंट नही करवाएँगे। तुम दोनों के प्रेम के विषय में सबको भड़का देंगे।फिर राधा की माँ पता चलेगा और राधा की माँ राधा को घर बाहर नही निकलने देगी।" एक गोपी ने कहा," फिर क्या होगी सखी?" दूसरी गोपी "अरि सखी होगा क्या? कृष्ण राधा से नहि मिल पायेगा बिचारा प्रेम में अकेला पड़ जायेगा" कृष्ण ने डरकर कहा," जैसा तुम चाहोगी वैसा ही होगा मै किसी को कुछ नही बताऊंगा ।" गोपियो ने कहा,"ये हुई ना समझदारी वाली बात, चलो अब हमारे पीछे पीछे।" कृष्ण बिचारे पीछे पीछे चलने लगे।
.कुछ दूर जाने पर कृष्ण उनसे कहने लगे," देखो सखियो गांव में मेरी बड़ी इज्जत है, मुझे ऐसा देखकर वे लोग क्या सोचेंगे , मेरा कुछ तो खयाल करो । " गोपियो ने कहा," देखो कान्हा हमेशा राधा के पीछे तो बड़े चाव से चलते हो, उसका हर भार उठाते हो, तो आज हमारा भार उठानेमे तुम्हारी बड़ी इज्ज़त जा रही है, शांति से चलो" कृष्ण ने धीरे से कहा," हा मैं तो आया ही हूँ अपने भक्तों का भार वहन करने के लिए और तुम सभी प्रिय भक्त हो मुझसे निस्वार्थ प्रेम करती हो और इसीलिये मैं तुम सबका ऋणी हूँ , और जो भी मुझसे सच्चे हृदय से प्रेम करता है मैं उन सबका भार वहन करता हूँ।"
अब कृष्ण के गाँव में प्रवेश करने पर क्या होगा ? ये सब देखेंगे अगली पोस्ट में तबतक," जय सियाराम, राधे राधे"
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