कृष्ण की जिद
कृष्ण और राधा एक दूसरे से फिर बिछड़ गए और अपने पुनः मिलन की प्रतीक्षा करने लगे | अब दोनों को मिलाने के लिए एक डोर की आवश्यकता थी, और उस डोर का नाम आप हम सभी जानते है वो डोर है "बाँसुरी " | कृष्ण को जब भी राधारानी की याद आती थी तब वे बाँसुरी बजाया करते थे और राधारानी उस बाँसुरी की तान को सुनकर अपनी सुदबुद खोकर नाचने लग जाती थी | ये बात सभी जानते है परंतु हम ये नहीं जानते की कृष्ण के बाँसुरी बजाने का अर्थ क्या है और राधारानी के नाचने का अर्थ क्या है | कृष्ण की बांसुरी ये राधारानी का ह्रदय है कृष्ण बांसुरी बजाते है अर्थात वो राधारानी के ह्रदय के तार छेड़ देते है जिससे उनके ह्रदय को अत्यंत हर्ष होता था | और राधारानी नाचती थी क्योंकि कृष्ण को उनका नाचना कृष्ण को अच्छा लगता था इससे उनका ह्रदय प्रफुल्लित होता था | देखा जाये तो वे दोनों ही केवल एक दूसरे की प्रसन्नता के लिए ही ये कार्य करते थे | यही प्रेम का सही अर्थ है प्रेम में हम अपनी नहीं केवल अपने प्रेमी की प्रसन्नता के लिए जीते है | राधाकृष्ण के प्रेम की विशेषता ही यही है की वे दोनों केवल एक दूसरे की ख़ुशी के लिए एक दूसरे के करीब आते है |![]() |
| मैया का कन्हैया |
कृष्ण ने अपने बचपन में ही अनेको राक्षसों का अंत किया था | एक बार कृष्ण अपनी मैया के गोद में खेल रहे थे | तभी उनकी नजर गयी चाँद पर, कृष्ण ने चाँद की ओर इशारा किया और कहा," मुझे ये चाहिए कितना सूंदर है ये |
माता यशोदा ने कहा," अरे लल्ला तू चाँद लेकर क्या करेगा | "
कृष्ण ने कहा, "वो मैं नहीं जानता मुझे चाँद चाहिए| "
माता यशोदा ने कहा, " अरे लल्ला चाँद दूर आसमान में है अब उसे में यहाँ तेरे लिए कैसे लाऊ ?"
कृष्ण ने कहा, " मुझे चाँद चाहिए बस, आप अपने लल्ला के लिए इतना नहीं कर सकती| "
ऐसा कहकर कहि रूठकर बैठ गए| अब मैया तोह सोच में पड गयी अपने लल्ला को कैसे मनाऊ ?
तभी मैया को एक युक्ति सूझी | मैया गयी अपने कान्हा के पास|
और हमारे कान्हाजी मुँह फुगाये, दोनों हाथों की बांधे, क्रोधित मुद्रा में चुपचाप बैठे थे |
मैया अपनी एक सखी की ओर इशारा करते हुए कहती है, " अरि सखी अब मैं क्या करू मेरा लल्ला रूठकर बैठ गया है, मैं तो उसके लिए चाँद लेकर आयी हूँ | "
कृष्ण ने कहा,"सच्ची मैया आप मेरे लिए चाँद लेकर आयी हो| "
मैया ने कहा," हा लल्ला आ मैं तुझे चाँद दिखा दूँ | "
ऐसा कहकर मैया ने एक बड़ा पातेला लेकर उसमें बहुत सारा स्वच्छ पानी भरा और उस पानी में कृष्ण को चाँद का प्रतिबिंब दिखाया | कृष्ण अत्यंत प्रसन्न हो गए | ताली बजाकर नाचने लग गए |
कृष्ण ने कहा," वाह मैया ये कितना सूंदर है | " और कान्हाजी ने उसे छूने की कोशिश की किंतु जैसे ही छूने की कोशिश की वो प्रतिबिंब तो बिगड़ गया | अब वे पुनः नाराज हो गए| अबकी बार आँखें भर आयी |
मैया ने देखा कान्हा तो पुनः नाराज हो गया | तभी मैया को ध्यान आया राधारानी का, उनकी सुंदरता का | उसी समय उन्होंने कृष्ण को अपने गोदी में लिया उनकी आँखें पोछी और कहा," इतने से नाराज हो गया मेरा लल्ला, अरे मैं तेरे लिए चाँद से भी सूंदर बहु लाऊंगी |"
कृष्ण ने कहा, " अर्थात मैया मेरा विवाह होगा किसके साथ?, कहा रहती है वो ?
मैया ने कहा, "हां लल्ला तेरे जन्म के वक़्त ही तेरा विवाह तेरे बाबा ने निश्चित कर दिया बरसाना की राधा के साथ,वो बाबा के मित्र की बेटी है और चाँद से भी अधिक सूंदर है| "
कृष्ण ने कहा," कब होगा मेरा विवाह? "
मैया ने कहा, "जब तू चाहेगा तब|"
कृष्ण ने कहा, " तो फिर ठीक है मैं अभी विवाह करना चाहता हु राधा से |"
सभी हसने लग गए
मैया ने कहा,"अरे लल्ला किंतु विवाह करने के लिए तुझे बड़ा होना होगा, अपने बाबा की भाती काम करना होगा वरना राधा कहेगी की कृष्ण तो कोई काम ही नहीं करता केवल माखन खाता है और अपनी मैया को परेशान करता है | "
कृष्ण ने कहा," अच्छा मैया राधा ऐसा कहेगी | तो फिर मैं काम करूँगा और बहुत बड़े बड़े काम करूँगा जिससे राधा जल्दी से मुझसे विवाह करेगी | "
मैया ने कहा, " अवश्य लल्ला तुझसे विवाह करने तो हम बड़ी बड़ी राजकुमारियों को देखेंगे| "
कान्हा ने कहा,"मुझे तो राधा से ही विवाह करना है, और इसीलिए मैं कल से ही गोचारण आरंभ करूँगा | "
मैया ने कहा, " हा हा लल्ला पर अब तू सोजा ताकि कल सुबह जल्दी उठ सके | "
कान्हा ने कहा, " मैया मुझे आशीर्वाद दो ताकि मेरे स्वप्न में मुझे राधा जी अपने दर्शन दे | "
मैया जोर से हसने लग गयी अपने कृष्ण का माथा चूमा और कहा, " तथास्तु"
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| मैया यशोदा |
और कृष्ण सो गए |
आगे की लीला अगले पोस्ट में , "जय सियाराम" " राधे राधे "


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