प्रेम - भगवान् तक पहुंचने का सरल मार्ग
प्रेम ये नाम तो हमने सदैव से ही सुना है | प्रेम जो मिल जाने पर जीवन में और कुछ मिलना शेष नहीं रह जाता | प्रेम की नीव विश्वास मैं है | यदि विश्वास नहीं तो प्रेम के कोई मायने नहीं होते | और मेरे आराध्य श्री कृष्ण ही प्रेम और विश्वास का मूल है | क्योंकि कृष्ण कभीभी अपने सच्चे भक्तो से अंतर नहीं रखते | ऐसीही कृष्ण की सच्ची भक्त थी मीराबाई जिनका चरित्र आज भी गया जाता है | मीरा जी ने सदैव स्वयं को कृष्ण की सखी उनकी प्रेयसी माना तथा उन्हें दर्शन प्रार्थना की है |
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| Meera Krishna |
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| love of Krishna |
मीरा के देवर राणा को मीरा जी का कृष्ण प्रेम बिलकुल भी नही भाता था | इसीलिए उन्होंने मीरा को जानसे मारने की कई बार कोशिश की , किन्तु सफल नहीं हो पाया | एक बार उसने ज़हर बनाने वाले एक व्यक्ति से कहा की वो अबतक का सबसे ज़हरीला विष बनाये | ताकि उसका प्रयोग वो मीरा जी पे कर सके | उस व्यक्ति ने भी ये मान्य कर लिया | मीरा जी कृष्ण भजन में तल्लीन थी तब राणा ने विष भरे कटोरे में थोड़ा पानी डालकर उसे कृष्ण जी का चरणामृत कहकर मीरा जी के सामने प्रस्तुत किया | और मीरा जी ने जब सुना की ये कृष्ण जी का चरणामृत है तब बिना कोई विचार किये तुरंत पि लिया | किन्तु जय हो उस जगदीश्वर की मीरा जी पे विष का कोई असर नहीं हुआ | अब राणा को बहुत गुस्सा आया उसे लगा की उस आदमी ने मीरा पे दया करके सही से विष नहीं दिया|
राणा ने कटोरे में जो थोड़ा विष बचा था उसे उसी व्यक्ति को पिने को कहा | और जबरदस्ती उसे पिलाया, उस भयानक विष के कारन उस व्यक्ति की मौत हो गयी | उस व्यक्ति के मौत की खबर सुनकर उसकी पत्नी अत्यंत व्यथित हो गयी | उसे मीरा जी पे पूरा भरोसा था इसलिए वो मीरा जी के पास जाकर अपने पति के जीवन की भीख मांगने लगी | तब मीरा जी कृष्ण जी से उस व्यक्ति के प्राणो के लिए गुहार लगाती है | और भला अपने प्रिय सखी की बात कृष्ण कैसे ठुकराते कृष्ण की कृपा से वो व्यक्ति फिरसे जीवित हो जाता है | वो व्यक्ति मीरा के चरणों में गिरकर उनसे क्षमा मांगता है |
ये होता है एक भक्त के भक्ति का प्रभाव | विष को अमृत बना सकता है मरे हुए को जीवित कर सकता है
चलिए आगे का अगली पोस्ट में तब तक के लिए " जय सियाराम " " राधे राधे "
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| मीरा |
ये होता है एक भक्त के भक्ति का प्रभाव | विष को अमृत बना सकता है मरे हुए को जीवित कर सकता है
चलिए आगे का अगली पोस्ट में तब तक के लिए " जय सियाराम " " राधे राधे "



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