Meera great devotee of krishna

प्रेम - भगवान् तक पहुंचने का सरल मार्ग 


प्रेम ये नाम तो हमने सदैव से ही सुना है |  प्रेम जो मिल जाने पर जीवन में और कुछ मिलना शेष नहीं रह जाता | प्रेम की नीव विश्वास मैं है | यदि विश्वास नहीं तो प्रेम के कोई मायने नहीं होते | और मेरे आराध्य श्री कृष्ण ही प्रेम और विश्वास का मूल है | क्योंकि कृष्ण कभीभी अपने सच्चे भक्तो से अंतर नहीं रखते | ऐसीही कृष्ण की सच्ची भक्त थी मीराबाई जिनका चरित्र आज भी गया जाता है | मीरा जी ने सदैव स्वयं को कृष्ण की सखी उनकी प्रेयसी माना तथा उन्हें दर्शन  प्रार्थना की है | 


meera, meera ji ka charitra
Meera Krishna 
मीरा का जन्म मेवाड़ में हुआ था | और उन्होंने अपना पूरा जीवन कृष्ण प्रेम में समर्पित कर दिया है | मीरा को सभी लोग पागल कहते थे | और मीरा दुनिया को पागल कहती थी | पागल कहने वालो की भी अपनी सोच होती है , जो भी उनकी सोच के विपरीत चले उन्हें लोग पागल कहते है | परमभक्त मीरा जी ने संसार के सभी सुख सुविधाओं का त्याग कर दिया , राजकुमारी होते हुए भी गली गली कृष्ण कृष्ण कहती फिरती थी इसलिए लोग उन्हें पागल कहते थे | और मीरा जी ने  गुरुहरीकृपासे  ये  जान लिया था संसार मिथ्या है केवल प्रभु ही सत्य है इसलिए वो दुनिया को पागल कहा करती थी, जो दुनिया सदैव मिटने वाले संसार  को ही अपना मानती है  और अपने  प्रभु पर  ध्यान नहीं देती |
meera
love of Krishna
  मीरा के देवर राणा को मीरा जी का कृष्ण प्रेम बिलकुल भी नही भाता था | इसीलिए उन्होंने मीरा को  जानसे मारने की कई बार कोशिश की , किन्तु सफल नहीं हो पाया | एक बार उसने ज़हर बनाने वाले एक व्यक्ति से कहा की वो अबतक का सबसे ज़हरीला विष बनाये | ताकि उसका प्रयोग वो मीरा जी पे कर सके | उस व्यक्ति ने भी ये मान्य कर लिया | मीरा जी कृष्ण भजन में तल्लीन थी तब राणा ने विष भरे   कटोरे  में थोड़ा पानी डालकर उसे कृष्ण जी का चरणामृत कहकर मीरा जी के सामने प्रस्तुत किया | और मीरा जी ने जब सुना की ये कृष्ण जी का चरणामृत है तब बिना कोई विचार किये  तुरंत पि लिया | किन्तु जय हो उस जगदीश्वर की मीरा जी पे विष का कोई असर नहीं हुआ | अब राणा को बहुत गुस्सा आया उसे लगा की उस आदमी ने मीरा पे दया करके सही से विष नहीं दिया|
मीरा 
राणा ने कटोरे में जो थोड़ा विष बचा था उसे उसी व्यक्ति को पिने को कहा | और जबरदस्ती उसे पिलाया, उस भयानक विष के कारन उस व्यक्ति की मौत हो गयी | उस व्यक्ति के  मौत की खबर सुनकर उसकी पत्नी अत्यंत व्यथित हो गयी | उसे मीरा जी पे पूरा भरोसा था इसलिए वो मीरा जी के पास जाकर अपने पति के जीवन की भीख मांगने लगी | तब मीरा जी कृष्ण जी से  उस व्यक्ति के प्राणो के लिए गुहार लगाती है | और भला अपने प्रिय सखी की बात कृष्ण कैसे ठुकराते कृष्ण की कृपा से वो व्यक्ति फिरसे जीवित हो जाता है | वो व्यक्ति मीरा के चरणों में गिरकर उनसे क्षमा मांगता है |
ये होता है एक भक्त के  भक्ति का प्रभाव | विष को अमृत बना सकता है मरे हुए को जीवित कर सकता है

चलिए आगे का अगली पोस्ट में  तब तक के लिए " जय सियाराम " " राधे राधे "




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Milan Tomic

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