भगवान की सहायता
पिछले पोस्ट हमने देखा कि भगवान अपने भक्तों कि सहायता करते है । इसका सबसे अच्छा उदाहरण है वृंदावन के सभी रहिवासी। आपको याद होगी वो कथा जब इंद्रदेव ने गोकुल पर भयानक वर्षा करके आक्रमण कर दिया था उस समय श्री कृष्ण ने पूरे गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। और सात दिन तक लगातार वर्षा होती रही किंतू कृष्ण के कारण गोकुल वासीयोका कोई नुकसान नहीं हुआ।
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| गोवर्धनधारी कृष्ण की जय |
इस कथा ये स्पष्ट होता है कि भगवान ने उस विपदा को नष्ट नहि किया अपितू उस विपदा का प्रभाव गोकुल वासीयों पर नहिं पडने दिया। बिलकुल इसी प्रकार भगवान हमारे संकटो को नष्ट नहि करते क्योकी वो हमारे कर्मो का फल होता है, अपितु वो अपने प्रेम का हमे सहारा देते हैं ताकि उस विपदा का दुष्प्रभाव हम पर ना पडे, और हम अधिक दुखी ना हो, हसते खेलते उस दुःख से बाहर निकले । बिलकुल जिस प्रकार माँ अपने बच्चे का दुःख हर लेती है उसे अपनी गोदी में लेकर । कितना दयालु है वो ईश्वर किंतू हम उसकी दयालुता का हमे एहसास ही नहि होता । हम हर बार केवल शिकायत करते रहते है, किन्तु जो दिया है उसका कभी धन्यवाद् नहीं करते । अब हमारे मन में ये प्रश्न आया होगा की सच्चा भक्त कैसा होता ? क्या पहचान होती है सच्चे भक्त की? भक्त और भगवान में क्या संबंध होता है ? अदि बहुत सारे प्रश्न
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मीरा के प्रभु गिरधर
इन सारे प्रश्नो का केवल एक ही उत्तर है की प्रभु का भक्त वही होता जो अपने इष्ट पर पूर्ण विश्वास रखता है । भगवान् अपने भक्त के विश्वास पर सदैव खड़े उतरते है ।
आगे इन भक्तो महान चरित्रों को अगली पोस्ट में देखेंगे
तब तक के लिए " जय सियाराम " " राधे राधे "
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