गुरु
अर्जुन के गुरु द्रोणाचार्य थे ये हम सभी जानते है, द्रोणाचार्य से अर्जुन ने धनुर्विद्या सीखी | लेकिन जब उसे धनुर्धारि का उपयोग धर्मयुद्ध के लिए करना था तब उसके मन को मोह ने ग्रास लिया | अर्थात उसके पास धनुर्धारी का ज्ञान तो था मगर जीवन के सत्य का ज्ञान नहीं था | इसलिए वो बीच कुरुक्षेत्र में असहाय होकर युद्ध से पहले ही हार मान चूका था | तब उसके जीवन में एक ऐसा गुरु आया जिसने उसके उस मोह का नाश किया, ना केवल मोह का बल्कि और भी जो विकार उसके मन में थे उन सबका नाश किया | और अर्जुन को धर्मयुद्ध के लिए तैयार किया | उस युद्ध में अर्जुन ने बहुत कुछ खोया और बहुत कुछ पा लिया | लेकिन कृष्ण ने उसे जो ज्ञान दिया था उससे उसे न कुछ खोने का दुःख हुआ और ना कुछ पाने की ख़ुशी | केवल इस इस बात का संतोष हुआ की आज उसकी वजह से धर्म की जीत हुई | समाज के पीड़ितों के साथ न्याय हुआ | श्री कृष्ण के उस दिव्य सन्देश को भगवतगीता कहते है | भगवतगीता के ज्ञान का वर्णन बड़े बड़े ज्ञानियों के लिए भी असंभव है | इस उदाहरण से स्पष्ट होता की हम चाहे जितने ही बड़े डॉक्टर या इंजीनीयर हो फिर भी हमें आध्यात्मिक ज्ञान ना हो तो हम उसका उपयोग केवल जेब भरने के लिए कर सकते है किसीके के कल्याण के लिए नहीं |
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| Krishna Arjun |
भगवतगीता के संदर्भ में कुछ कह सकू इतनी मेरी औकात नहीं है | किन्तु इतना अवश्य कहूँगी श्री कृष्ण के वो विचार आज भी प्रेरणादायी है और हमेशा रहेंगे | एक घटना का में यहाँ वर्णन करना चाहूंगी की एक बार एक महिला को कुछ लोग छेड़छाड़ करके परेशान कर रहे थे | ऐसा होते हुए एक आदमी ने देखा वो उस स्त्री की मदत करना तो चाहता था लेकिन कर नहीं पाया | क्योकि उसने सोचा यदि उसने उस महिला की मदत की तो संभवत: ये लोग कल को उसके घर आकर उसे और उसके बीवी बच्चो को परेशान करेंगे याफिर शायद उसकी जान भी लेले | क्यों बेकार के झमेले में पडो | ऐसा विचार करके कोई आगे नहीं आया | इस इंसान की और अर्जुन की दुविधा एक ही है | दोनों को ही मोह हो गया था अपनों का और इसलिए धर्म का साथ नहीं दिया | तब श्री कृष्ण शरीर रूपसे नहीं थे मगर उनकी भगवतगीता तो थी | अगर पढ़ लेता तो कायर होने से बच जाता | खैर... आगे चलके कुछ सालो बाद उसकी मृत्यु हो गयी | यम के दूत उसे लेने आये अब उसने कहा "मैंने तो कोई पाप कही किया तो फिर मुझे क्यों नरक में ले जाया जा रहा है |" यम दूतो ने कहा " तुमने एक खून किया है |" उसने कहाँ की मैंने ज़िंदगी में किसी का भी बुरा नहीं किया |" यमदूतो ने कहा वो लड़की जिसे कुछ लोग परेशान कर रहे थे उसने उनकी परेशानी से तंग आकर आत्महत्या कर ली अब तुम तो वही थे लेकिन कायर बनकर तमाशा देखते रहे तुमने उसे क्यों नहीं बचाया | उसने कहा "यदि में उसे बचाता तो वो लोग मुझे मार डालते |" यमदुतो ने कहा "तो फिर अब कौनसे ज़िंदा हो मर ही गए न फर्क सिर्फ इतना है अगर उसकी जान बचा लेते तो तुम्हारा सम्मान होता और तुम स्वर्ग चले जाते किन्तु तुमने ऐसा नहीं किया इसलिए अब नरक में जाना पड रहा है | " उसने कहा "वो लोग मेरे बीवी बच्चो को तंग करते उनकी जान ले लेते | और में उनसे बहुत प्यार करता हूँ | "यमदूतो ने कहा " ये प्यार नहीं मोह है | यदि तुम प्यार करते स्वयं भी वीर होते और बच्चो को भी कायर नहीं बनाते | प्रेम वीरता और निर्भयता सिखाता है कायरता नहीं | फिर भी हम तुम्हे एक रात का समय देते है यदि तुम्हारे बीवी बच्चे तुम्हे सचमुच में प्यार करते है तो उनसे कहो वो खुद यहाँ हमारे सामने आकर ऐसा कहे की तुमने उस लड़की के साथ अन्याय केवल उनके लिए ही किया था हम तुम्हे छोड़ देंगे किन्तु हमें कोई भी ऐसेही नहीं देख सकता हमे देखने के लिए उन्हें भी मरना होगा क्या वो इसलिए तैयार होंगे | "उस इंसान ने कहा" में कोशिश तोह कर सकता हूँ | "उस रात को वो अपने बीवी बच्चे सबके सपने में गया और सारी हकीकत बताई | सबलोग सपना समझके भूल गए | फिर उसने यकीं दिलाने के लिए दिवार पर सबकुछ लिखा पर उसके घर वालो को लगा की किसीने जान पुछके ऐसा किया है | अब उस इंसान ने यमदूतो से विनती की कुछ क्षणों के लिए उसे उन सबको दिखने दो ताकि वो सारी बात सामने सामने कर सके | यमदुतो ने इस बात की भी मंजूरी देदी | अब उसने सबको बुलाया और जो सच था वो सबको बता दिया | सबने उसके लिए मरने से इंकार कर दिया और कहा यदि उसे उस लड़की मदत करनी होती तो वो कैसे भी कर देता | उसकी कायरता के लिए हम क्यों अपनी जान दे | आगे कहा की उन्हे शर्म आती है की ऐसा कायर उनका पिता था | यमदुतो ने कहा देखा जिनके लिए तुमने धर्म के ऊपर ध्यान नहीं दिया आज वही लोग तुम्हे दुत्कार रहे है | अब चलना है या और गाली सुननी बाकि है | उस इंसान ने अपना सर झुका दिया और फिर यमदूत उसे नरक में ले गए | इस कहानी से हमे ये सिख मिलती है "धर्मो रक्षति रक्षित:" अर्थात जो धर्म की रक्षा करता है समय आनेपर धर्म उसकी रक्षा करता है |
आगे का अगली पोस्ट में तब तक लिए "जय सियाराम " "राधे राधे "

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