गुरू
गुरु ही ब्रह्मा है , गुरु ही विष्णु है , गुरु ही महेश है और गुरु साक्षात् परब्रह्म है | गु अर्थात अंधकार रु अर्थात मिटनेवाला और संपूर्ण गुरु इस शब्द का अर्थ है जो हमारे जीवन से अंधकार को मिटा दे उसे गुरु कहते है |
ये ब्लॉग पढ़नेवाले सभी को मेरा आदरसहित हरी ॐ | मैंने ये ब्लॉग संपूर्ण रूपसे अपने गुरुदेव को समर्पित करते हुए लिखा है | मेरे आराध्य भगवान श्री कृष्ण के चरणों में मेरा कोटि कोटि प्रणाम राधे राधे | इस दुनिया में अनगिनत लोग है | और सबकी अपनी अलग अलग सोच है, इसलिए यदि मेरे विचार किसीको अच्छे ना लगे तो में उनसे क्षमा चाहती हूँ | और जिनको अच्छे लगे उनका स्वागत करती हूँ , अपने इस आध्यात्मिक प्रवास में | इस ब्लॉग की शुरुवात गुरु वंदना से मैंने कर ही दी है अब आगे बढ़ते है |
अभी हम चर्चा कर थे गुरुदेव पर | ये तो हम सभी जानते है की अगर जीवन में कुछ बनना चाहते तो पढ़ना लिखना अत्यंत आवश्यक है | पढ़ा लिखकर ही तो आगे चलकर हम डॉक्टर , इंजीनीर या जो भी बनना चाहते है वो बन सकते है | किन्तु हर डॉक्टर और इंजीनीर के पीछे उन्हें पढानेवाले उनके शिक्षकों का हाथ होता है | शिक्षक उन्हें पढाते है उन्हें ज्ञान देते है जिससे वो आगे बढकर अपने गंतव्य को हासिल कर लेते है | परन्तु इसमें एक कमी है जब हम मर जाते है तो ये विद्या,ये पैसा ,ये पद हमारे किसी काम नहीं आता लोग दो तीन दिन रो कर हमें भूल जाते है, पर ऐसा नहीं है की लोग सबको भूल जाते है,कुछ लोग है जिन्हे ये दुनिया सदैव स्मरण करती है जैसे भक्त ध्रुव , भक्त प्रल्हाद , मीराबाई और कई भक्त है जिनके गुणगान लोग आज भी गाते है | इन सबने भी गुरु किये लेकिन वो गुरु किये जो इन्हे जीवन का सही अर्थ समझाए जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्त कर दे | इसका सही अर्थ एक उदाहरन से स्पष्ट करती हूँ | इसका सही उदाहरण है अर्जुन और श्री कृष्ण
आगे का अगले पोस्ट में तब तक लिए " जय सियाराम " " राधे राधे "

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